
वैसे ये भी एक मोहल्ला विवाद ही है। पर अविनाश का मोहल्ला नहीं, सराए वालो का साईबर मोहल्ला जिसमें दिल्ली के वंचित वर्ग के बच्चों के ब्लॉग लिखने की एक परियोजना साईबर मोहल्ला नाम से चलाई जाती है। जिनमें से कुछ चयनित सामग्री का प्रकाशन पुस्तकाकार में किया जा रहा है। जिसकी समीक्षा स्वरूप यह लेख लिखा गया है। यूँ यह मुख्यधारा चिट्ठाकारी पर आधारित नहीं है पर दिशा इधर ही है। वैसे स्वागत किया जाना चाहिए या पता नहीं.....। सावधान ब्लॉगर समुदाय....बड़े समीक्षकों की नजर अच्छा शकुन ही हो यह जरूरी नहीं।
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