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Friday, April 13, 2007

टैक्‍नोराटी हिंदी ब्‍लॉगिंग का कर्बला क्‍यों है

टिप्‍पणी चिंतन के प्रत्‍येक पुरोधा ने बताया कि परस्‍पर पीठ खुजाना है, उधार चुकाना है, एक दूसरे को बढ़ावा देना है। देखा जाए तो भला काम है। पर इसी किस्‍म का एक और काम है जो इसी तरह एक दूसरे की पीठ खुजाना है, उधार चुकाना है और भला काम है पर दिक्‍कत है कि अधिक कसाले काम है और कुछ ज्‍यादा सृजनात्‍मकता की मॉंग करता है और वह है परस्‍पर लिंकन। यानि लिंक देना और लिंक लेना। वैसे विवादों से यह सधता होगा पर फिलहाल हम उस पर बात नहीं कर रहे हैं। हम तो इस सवाल पर मगजमारी कर रहे हैं कि ये टैक्‍नोराटी जो इन लिंकन-प्रतिलिंकन की चाल पर नजर रखता है उससे मूल्‍यांकन करता है वो भला इतना हिंदी विरोधी क्‍यों है। एकाध बिरले को छोड़ दें तो अधिकतर चिट्ठों के परिचय में कोयले से भरी मॉंग की तरह सजा होता है - नॉट इन टॉप 100000।


यानि हिंदी चिट्ठे चोटी के 100000 चिट्ठों में भी शुमार नहीं होते। ऐसा क्‍यों भई... कोई तो बताए।
अब उदाहरण के लिए चिटृठा चर्चा पर विचार करें जो अंतत: एक चिट्ठा ही है। एक बेहद लोकप्रिय चिट्ठा है खूब पढ़ा जाता है और खूब लिखा जाता है। अब तक 340 पोस्‍ट लिखी जा चुकी हैं। यदि टैक्‍नोराटी की ही भाषा में बात करें तो यह बहुत से हिंदी चिट्ठाकारों के ब्‍लॉग रोल में भी है। और लिंक- अब क्‍या कहें यह तो है ही लिंक (आऊटवर्ड) देने के लिए और इनवर्ड लिंक भी मिलते ही हैं। लेकिन यदि टैक्‍नोराटी जाकर झांकें तो मिलता है ये-





अब कोई टेकीज में से हमें बताए कि कैसे इतना लोकप्रिय चिट्ठा चर्चा 4 लिंक दिखा पा रहा है ( वैसे नीचे खुद ही 664 लिंक बताता है) और रैंक 10,38,416 जबकि मुझ जैसे कुनाम ब्‍लॉगर तक का रैंक डेढ़-पौने दो लाख के लपेटे में है। पर इसका मतलब ये नहीं कि टैक्‍नोराटी की जरूरत नहीं है। है और बिल्‍कुल है। हमें चाहिंए कि परस्‍पर रुचि के विषयों पर लिखें और यही नहीं वरन बाहर के लोगों की रुचि के विषयों पर ध्‍यान दें ताकि ये जो टैक्‍नोराटी हिंदी ब्‍लॉगिंग का करबला बना हुआ है वहाँ कुछ सुधार हो। वैसे एक मजेदार पोस्‍ट इस लिहाज से मानसजी क‍ि यह पोस्‍ट है जिसमें उन्‍होंनें हर चिट्ठे को गिना दिया है जिससे शायद सबका टैक्‍नोराटी हित सधता हो (शायद इसलिए कि मेरे लिंको की जो सूची टैक्‍नोराटी पर थी उसमें तो इसका उल्‍लेख पता नही क्‍यों नहीं था) या फिर टेक्‍नोराटी फेवरेट एकसचेंज के इस कार्यक्रम पर विचार करें।