चिट्ठाकारी में कविताएं खूब चलती हैं, कई बार तो चिट्ठाचर्चा तक कविताई में हो जाती है....कारण कोई बहुत गंभीर नहीं सिर्फ इतना है कि उसमें टाईप कम करना पड़ता है। खैर हम आज आपको कहानी सुनाएंगे।
ये कहानी एक अलग दुनिया की है। ये दुनिया रीयल तो नहीं है लेकिन विश्वास करें रीयली यह दुनिया
है। इस दुनिया के बहुत से दरवाजे हैं और हर दरवाजे का एक अंधकारमय रास्ता है, वह इसलिए कि जब आप इस अंधकारमय रास्ते से गुजरें तो आप कोई एक मुखौटा पहन लें। ये आप अपनी मर्जी से चुन सकते हैं और पसंद न आए तो बदल भी सकते हैं, मुखौटों के चेहरे पर लगते ही आप बस एक मुखौटा हो जाते हैं। लोग इस दुनिया में इसलिए जाते हैं कि ये मुखौटे इस दुनिया के वासियों को आजाद करते हैं। आप इन मुखौटों को पहनकर वह सब कर सकते हैं जो करना चाहते थे पर कर नहीं पाते थे और अक्सर दिखाते थे कि आप ऐसी कोई चाहत नहीं रखते, मसलन चलते चलते आपका अक्सर मन करता था कि चीख कर कहें कि आप खुश नहीं हैं, आपका पति आपको पीटता है...या आप अपनी पत्नी को पीटते है...लेकिन जाहिर है ऐसा नहीं कर पाते थे। यह नई दुनिया खूब पसंद की गई, लोग इसमें आते घंटों घूमते मन भर की बातें हरकतें करते...बाद में मुखौटा उतारकर घर चले जाते। वे खुश थे....दुनिया खुश थी।
फिर कुछ ऐसा हुआ कि एक दिन एक मुखौटाधारी को इस दुनिया के, मतलब मुखौटों की दुनिया के ब्रह्मा के खिलाफ कुछ कहते सुना गया। पता नहीं किसने कहा था, मुखौटे के कारण पहचाना नहीं जा सका, क्या किया जाए। ब्रह्माजी गुस्सा पीकर रह गए। पर उन्होंने एक बड़े लाउडस्पीकर पर चिल्ला चिल्लाकर कहा कि खबरदार किसी ने यह सब कहा तो...नहीं चलेगा। आखिर हमने इतनी मेहनत से ये दुनिया बनाई है..ऐसा नही कहो। दुनिया के कई पुराने बाशिंदे जो हमेशा एक ही मुखौटा लगाते थे तुरंत मान गए। पर अब ऐसी घटनाएं बढ़नी लगीं.....ब्रह्मा और कई उनके चेले चपाटे इस बात से दुखी हो गए कि कोई उनकी खड़ी की गई दुनिया में आए और जो मन में आए वह बोले ये तो ठीक नहीं....
इलाज पहले तो ये निकाला गया कि ये लोग जिस तिस के पास जाते और मुखौटे को उठाकर चेहरा देखते ताकीद करते, धमकाते।
लेकिन इसका उलटा असर हुआ...जिनके चेहरे से मुखैटा हटाया जाते उन्हें बुरा लगता....वे या तो इस दुनिया में आना बंद कर देते। या अगली बार मुखौटा बदल देते।
दुनिया के उजाड़ होने का भी खतरा था पर यहॉं तो कुछ नया ही हुआ कि....दुनिया के सभी दरवाजों पर एक बोर्ड लगाया गया कि अब से
'इस दुनिया में मुखौटा लगाकर प्रवेश वर्जित है'।मित्रो, कहानी यहीं समाप्त हो जाती है। पर दुनिया जारी रहती है। मैं चिट्ठाशास्त्र की बात इतनी शिद्दत से इसीलिए कर रहा था इतने दिनों से। कृपया इस बात का सम्मान कीजिए कि यहाँ इस चिट्ठाकारी की दुनिया का दस्तूर ही है कि यहाँ मुखौटा लगाकर रहा जाता है...मुखौटा यहाँ का अजूबा नहीं है।
इसलिए इस पोस्ट को अवश्य पढ़ें
‘भाया, अगर नकाब पहनकर कुछ भी कहना है तो बहुत आसान है। पर्दे के पीछे अगर आप किसी को गाली भी दोगे तो कोई भी आपका कुछ नही बिगाड़ सकेगा। इसलिए जो कहना है, सामने आकर कहो। ये परिवार सबकी सुनता है, सारे निर्णय सामूहिक होते है।‘
इन अभिव्यक्तियों में दिक्कत है। जिसे नोटपैड
(.....मुझे लगता है परिवार वाली अवधारणा मे ही दिक्कत है. पहले हम परिवार बनाएगे फिर सास-ससुर,जेठ-जेठानी,ननद-बहनोई भी पैदा होगे ही.तब तो हमारा यह परिवार बन जाएगा" कहानी घर घर की"....!! ) व अनुपम ने दर्ज किया है और ठीक किया है।
ध्यान दें कि खतरा यह है कि यदि आप इसे वाकई मुखौटों से मुक्त दुनिया बना देंगें तो ये दुनिया बाहर की ‘रीयल’ दुनिया जैसी ही बन जाएगी – नकली और पाखंड से भरी। आलोचक, धुरविरोधी, मसिजीवी ही नहीं वे भी जो अपने नामों से चिट्ठाकारी करते हैं एक झीना मुखौटा पहनते हैं जो चिट्ठाकारी की जान है। उसे मत नोचो---ये हमें मुक्त करता है।
और हाँ मेरी बेटी की एक्टिविटी बुक में कई सारे मुखौटे बने हैं, जिन्हें रंग करना, पहनना उसे बेहद पसंद है। देखिए मेरा फैमिली फोटो
(ये समुद्री डाकू मैं हूँ, शेरनी स्वाभाविक है श्रीमतीजी हैं, सुदर राजकुमारी हमारी बिटिया श्रे... है और डोनाल्ड हमारा बेटा प्र... रास्ते में मिले तो पुचकार देना...कहना आप उसके पापा के दोस्त हैं।)