Thursday, March 05, 2009

धत्‍त !!! अब ज्‍योतिष ब्‍लॉगवाणी में भी

ज्‍योतिष के साथ तो पता नहीं पर ब्‍लॉगजगत के ज्‍योतिषियों साथ हमारा 'स्‍नेह' अब जग जाहिर है। ऐसे में अपनी छवि के साथ न्‍याय करते हुए हमारा हक बनता है कि कहीं नया ज्‍योतिष प्रपंच देखें तो चिहुँकें तो इसी बात से न्‍याय करते हुए आज हम धत्‍त कह रहे हैं। इस छवि को देखें-

jyotish

वैसे तो जो कलंक रेखा :) जो हमने खींची हे वो पर्याप्त मोटी है पर तब भी दिखने में कुछ कठिनाई हो तो छवि पर चटका लगा सकते हैं।

वैसे ये विज्ञापन भर है जो ब्‍लॉगवाणीकार मित्रों की कंपनी द्वारा विकसित उत्‍पाद को प्रचारित भर करता है, और बेशक उन्‍हें इसका पूरा हक है। पर जब हमने दु:खी होने की ठान ली है तो भला हमें कौन रोक सकता है। वैसे प्रोग्रामर मित्र इस साफ्टवेयर को लेकर काफी लौकिक सोच रखते हैं पर आशंका है कि कुछ लोग तो इसकी अलौकिक लपेट में आते ही होंगे।

हमें लगा कि ज्योतिष के पसरते गर्तचक्र पर अपना रंज व्‍यक्त करते चलें। बाकी तो होगा वही जो ब्‍लॉगजगत की 'कुंडली में लिखा' होगा।:) 

26 comments:

Rachna Singh said...


hindi blog reporter


पर जीवन साथी .कॉम का विज्ञापन भी इसी कटेगरी मे आता हैं . आप अगर इंग्लिश का ब्लॉग लिख सकते हैं और उस पर एक matrimonial साईट का ad दाल सकते हैं तो ब्लोग्वानी पर ज्योतिष के ad क्यूँ नहीं आ सकते . matimonail site की लपेट मे भी बहुत से जीवन नष्ट होते हैं
बाकी पसंद अपनी अपनी और कमाने का अधिकार सिर्फ आप को ही हो ब्लॉग से ये तो बहुत ना इंसाफी हैं !!!!!!

Rachna Singh said...
This comment has been removed by the author.
संगीता पुरी said...

बाकी तो होगा वही जो ब्‍लॉगजगत की कुंडली में लिखा होगा।:)
आप जैसे बुद्धिजीवी लोग भी यही सोंचकर बैठ जाएंगे तो यह गडबड होगा ... जहां तक मैं समझती हूं ज्‍योतिष के पक्ष और विपक्ष में जमकर वाद विवाद होना चाहिए।:)

अंशुमाली रस्तोगी said...

हमने भी इसे देख तो लिया था पर वहां गए नहीं। क्या फायदा? इस भूत भविष्य में न ही पड़ना बेहतर है भाई।

मैथिली said...

"बाकी तो होगा वही जो ब्‍लॉगजगत की कुंडली में लिखा होगा।"

लगता है फिर आपको भी इस कुंडली से होने पर विश्वास हो चला है..:)

Arvind Mishra said...

मैं फलित ज्योतिष को परले दर्जे का अंधविश्वास मानता हूँ !

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

मसिजीवी जी, ईश्वर की भांती ही चिट्ठाजगत और ब्लागवाणी वाले भी बहुत कृ्पालु हैं....महाराज्! जब इसने बडे बडे बुद्धिजीवियों को आश्रय दे दिया तो बेचारे इन निरीह जीवों(आप की भांती ही कुछ भक्त इन्हे ज्योतिषि भी कहते हैं) ने इनका क्या बिगाडा है.
बेचारे ये भी पडे रहेंगे किसी कोने में.....अगर आप की कृ्पादृ्ष्टि बनी रही तो ?.))

Suresh Chiplunkar said...

वाह, वाह प्रोफ़ेसर साहब खूब लिखा आपने, वैसे ज्योतिष, वास्तु, चमत्कार आदि के "खास" (बल्कि खासुलखास) प्रेमियों की लिस्ट में हमारा नाम तो लिखा है ना आपने!!

Cyril Gupta said...

अरे वाह. बड़ा धांसू आर्टिकल लिखा है.

पढ़ के मजा आ गया... :)

ज्योतिष प्रेमियों में हमारा नाम भी शामिल कर लिया जाये.

ab inconvenienti said...

ज्योतिष व्यक्तिगत आग्रह की विषय वास्तु है व व्यक्ति विशेष की पसंद नापसंद पर निर्भर करती है. मैं ज्योतिष नहीं मनाता पर कोई इंटरनेट जाननेवाला लिखा पढ़ा इन्सान ज्योतिषी की सलाह लेना चाहे तो मैं और आप उसके और ज्योतिषी के बीच बोलने वाले कौन होते हैं? सब अपना भला बुरा समझते हैं.

विनीत कुमार said...
This comment has been removed by the author.
विनीत कुमार said...

हमने भी इसे देख तो लिया था पर वहां गए नहीं। क्या फायदा? इस भूत भविष्य में न ही पड़ना बेहतर है भाई।.....
सरजी, पिछले पन्द्रह दिनों से यूथ कल्चर के अलग-अलग संदर्भों से माथा-पच्ची करता रहा। इसी क्रम में रंग दे बंसती में डीजे का एक डॉयलाग पकड़ में आ गया- एक टांग पास्ट में और एक टांग फ्यूचर में इसलिए तो हम प्रेजेंट पर मूतते हैं। अब मैं इन दोनों टांगों को यहां दो काल के सहारे टिकाने के रुप में समझ रहा हूं। बात सिर्फ ज्योतिष की नहीं है, एक बड़ी इन्डस्ट्री के खत्म हो जाने का खतरा है। क्योंकि बाकी जगहों पर तो पांच रुपये का सामान भी ग्राहक मोल-भाव करके खरीदता है, यहां तो भय, आशंका और अपशगुन को लेकर सौदा होता है।

Udan Tashtari said...

आप भी न, मित्र!! क्या कहें...छुट्टियाँ शुरु हो गई क्या विश्वविद्यालय में?? :)

अनूप शुक्ल said...

धत्त! :)

sanjay vyas said...

इससे पहले भी आप संगीता जी के आलेख पर टिपण्णी दे चुके है जो मेरी नज़र में आई थी और आज फिर ग़मज़दा है.थोडा विस्तार से और कठोर होकर लिखने की ज़रुरत थी.खैर मैं भी आपके साथ दुखी हूँ,जिस तरह से इस विव्हर में सारा समाज जा रहा है.इस प्रपंच पर रोष भी व्यक्त किया जाना चाहिए.
मैं आपके साथ हूँ.

पंगेबाज said...

मै यहा कुछ कहना चाहूंगा . हर एक को अपने जीवन यापन के लिये भी कुछ करना होता है . केवल ब्लोगिंग कर या एग्रीगेटर चला कर पेट मे रोटी नही जाती जी . मसीजीवी जी बालको को डाटपीट कर अपना जिविकोपार्जन करते है मै एक अदद छोटी सी कार्यशाला चलाता हू समीर भाई लोगो के एकाऊंट से छेडा छाडी कर उन्हे टैक्स से बचने की राय देते है . ठीक इसी तरह से हिंदी जगत के दो एग्रीगेटर चलाने वालो की जिविका का साधन ( श्री प्रतीक पांडेय जी हिंदी ब्लोगस और श्री सिरिल जी ब्लोगवाणी )ज्योतिष के सोफ़्ट्वेयर ही है जिनसे बेहद मेहनत से अर्जित आय का एक हिस्सा वो हिंदी की इस सेवा मे लगाते है . मै नही समझता की कभी भी प्रतीक जी या सिरिल जी ने अपनी राते काली होने का रोना रोकर हम सब ब्लोगर्स पर एहसान जताने की कोशिश की हो या नारद की तरह किसी से कोई पैसा मांगा हो और फ़िर हम सब पर ढेरो एहसान भी लादे हो . तो भाई अगर वो अपने पूर्ण स्वामित्व वाले एग्रीगेटर पर अपना कॊइ विज्ञापन लगाते है तो हमे उसका प्रतिकार धत्त कह कर करना चाहिये मै एसा नही समझता . जब आप आपने ब्लोग पर ढेरॊ छोकरी से लेकर कर नौकरी और जमाने भर के विज्ञापन लगाते है तो क्या हमे मुफ़्त मे सुविधा उपलब्ध करा रहे एग्रीगेटर का खुद के स्थान पर इतना हक नही बनता कृपया धत्त कहने से पहले सोचिये फ़िर अपना मुखारबिंद खोलिये . उम्मीद है आप मेरी भी मौज को समझ गये होंगे :)

अनूप said...

एक टांग पास्ट में और एक टांग फ्यूचर में इसलिए तो हम प्रेजेंट पर मूतते हैं। विनीत जी हम भी आपके साथ आपने वर्तमान पर सूसू करते है गंदी जगह यही करना चाहिये आप सही कर रहे है बधाई उम्मीद है बाकी ब्लोगर्स भी आपके इस पूनीत कार्य आपके वर्तमान पर सूसू करना मे आपका सहयोग देंगे :)

कुश said...

अपुन तो न्यूट्रल है

अनिल कान्त : said...

मैं रचना जी की बात से बिलकुल सहमत हूँ

RAJIV MAHESHWARI said...

आ बैल मुझे मार.........

रंजन said...

ये व्यक्तिगत पसंद नापसंद की बात है.. उन्होने विज्ञापन लगाया उनकी इच्छा, आपको जो अच्छा लगा आपने लिखा.. इसिलिये तो ब्लोग्स है...

सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi said...

मुझे आपका ब्‍लॉग अच्‍छा लगता है।
आपके पोस्‍ट प्रभावित करने वाले होते हैं। मैं खुद ज्‍योतिष पर लिखता हूं। सालों से पढ़ और सीख रहा हूं। हजारों कुण्‍डलियां देख चुका हूं। इसके बाद मैं इस विषय पर बोलता हूं तो लगता है कि जो जानता हूं उसी के बारे में बोल रहा हूं।

आप व्‍यक्तिगत आक्षेप छोड़कर सीधे इस विषय के खिलाफ ही क्‍यों नहीं लिखते। आप अपने बर्थ डाटा दीजिएगा। देखूंगा कि आपमें ज्‍योतिष सीखने की कुव्‍वत है या नहीं। अगर हुई तो आपको ज्‍योतिष सीखने की सलाह दूंगा। ताकि आप अधिक तल्‍ख और सीधी बात कह सकें इस विषय पर। ना कि इस विषय से जुड़े लोगों पर टिप्‍पणियां कर उन्‍हें आहत करें।

केवल हलचल पैदा करना ही उद्देश्‍य है तो बात अलग है।

Saaz Jabalpuri said...

jis tarah har insaan ka chehra hamen lubhata nahin usi tarah har visay hamen lubhata nahin. iska matlab ye nahin ki falan insaan ko nahin jeena chaahiye ya falan visay ko nahin chhapna chaahiye.budhd jeeviyon ko pasan na pasand ka dhyan rakhna hoga. bahut se kahte hain ki eshwar hai.bahut se kahte eshwar nahin hai. eshwar ne maanane vale aur n maanane vale dono hi paida kiye aur dono hi jee rahe hain.apni apni jagah dono ki maanyata hai.

MAYUR said...

होली की मुबारकबाद,पिछले कई दिनों से हम एक श्रंखला चला रहे हैं "रंग बरसे आप झूमे " आज उसके समापन अवसर पर हम आपको होली मनाने अपने ब्लॉग पर आमंत्रित करते हैं .अपनी अपनी डगर । उम्मीद है आप आकर रंगों का एहसास करेंगे और अपने विचारों से हमें अवगत कराएंगे .sarparast.blogspot.com

प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर said...

होली कैसी हो..ली , जैसी भी हो..ली - हैप्पी होली !!!

होली की शुभकामनाओं सहित!!!

प्राइमरी का मास्टर
फतेहपुर

Prem Farrukhabadi said...
This comment has been removed by the author.