Sunday, May 01, 2016

दुनिया होने का सच

एक होते हैं शब्द
और होती है शब्दों की दुनिया
जैसे एक होता है प्यार
और होती है प्यार की दुनिया
पर सुनो प्यार होता प्यार..
लेकिन प्यार की दुनिया होती है
झूठ, धोखा और लिसड़ा हुआ स्वार्थ
एक होती है कविता
और होती है कविता की दुनिया
टकराती प्रवंचनाएं, फूहड़ अहम् और छद्म शिखर
सुनो दुनिया
तुम हर सच के साथ ऐसा क्यों करती हो
उसे सच रहने क्यों नहीं देती
क्योंकि एक होता है सच
और होती है सच की दुनिया
जो
और चाहे दुनियाभर का कुछ भी हो
सच नहीं होती।

3 comments:

HARSHVARDHAN said...

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन सत्यजीत रे और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

Kavita Rawat said...

ये दुनिया है जितने लोग उतनी सोच ..
आपको जन्मदिन की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं!
.

Kavita Rawat said...

ये दुनिया है जितने लोग उतनी सोच ..
आपको जन्मदिन की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं!
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