Wednesday, October 10, 2007

ॐ अष्ट‌ध‌ातुओं के ईंटो के भ‌ट्टे.....ॐ म‌ह‌ाम‌हिम, म‌हम‌हो उल्लू के प‌ट्ठे - नागार्जुन की कविता आडियो में

उम्‍मीद हैं संघी मित्र नाराज नहीं होंगे। नागार्जुन की कविता मंत्र सही मायने में ए‍क ब्‍लॉगिया कविता है- बिंदास, सपाट, दुनिया की ऐसी की तैसी टाईप सच्‍ची कविता। संजय झा ने फिलम बनाई है स्ट्रिंग जिसमें इस कविता को ज़ुबीन ने गाया है। खुद संजय झा ब्‍लॉग बनाकर प्रचार भी कर रहे हैं। इस ब्‍लॉग में हिंदी भी है- तो इस मायने में इस तरह का पहला ब्‍लॉग हुआ। खैर पूरी कविता नीचे है और हमारे पहले पॉडकास्‍ट में हम इस गीत को प्रस्‍तुत कर रहे हैं।

 

 

मंत्र कविता / नागार्जुन

ॐ श‌ब्द ही ब्रह्म है..

ॐ श‌ब्द्, और श‌ब्द, और श‌ब्द, और श‌ब्द

ॐ प्रण‌व‌, ॐ न‌ाद, ॐ मुद्रायें

ॐ व‌क्तव्य‌, ॐ उद‌ग‌ार्, ॐ घोष‌णाएं

ॐ भ‌ाष‌ण‌...

ॐ प्रव‌च‌न‌...

ॐ हुंक‌ार, ॐ फ‌टक‌ार्, ॐ शीत्क‌ार

ॐ फुस‌फुस‌, ॐ फुत्क‌ार, ॐ चीत्क‌ार

ॐ आस्फ‌ाल‌न‌, ॐ इंगित, ॐ इश‌ारे

ॐ न‌ारे, और न‌ारे, और न‌ारे, और न‌ारे

ॐ स‌ब कुछ, स‌ब कुछ, स‌ब कुछ

ॐ कुछ न‌हीं, कुछ न‌हीं, कुछ न‌हीं

ॐ प‌त्थ‌र प‌र की दूब, ख‌रगोश के सींग

ॐ न‌म‌क-तेल-ह‌ल्दी-जीरा-हींग

ॐ मूस की लेड़ी, क‌नेर के प‌ात

ॐ ड‌ाय‌न की चीख‌, औघ‌ड़ की अट‌प‌ट ब‌ात

ॐ कोय‌ल‌ा-इस्प‌ात-पेट्रोल‌

ॐ ह‌मी ह‌म ठोस‌, ब‌ाकी स‌ब फूटे ढोल‌

ॐ इद‌म‌ान्नं, इम‌ा आपः इद‌म‌ज्य‌ं, इद‌ं ह‌विः

ॐ य‌ज‌म‌ान‌, ॐ पुरोहित, ॐ राज‌ा, ॐ क‌विः

ॐ क्रांतिः क्रांतिः स‌र्व‌ग्व‌ं क्रांतिः

ॐ श‌ांतिः श‌ांतिः श‌ांतिः स‌र्व‌ग्व‌ं श‌ांतिः

ॐ भ्रांतिः भ्रांतिः भ्रांतिः स‌र्व‌ग्व‌ं भ्रांतिः

ॐ ब‌च‌ाओ ब‌च‌ाओ ब‌च‌ाओ ब‌च‌ाओ

ॐ ह‌ट‌ाओ ह‌ट‌ाओ ह‌ट‌ाओ ह‌ट‌ाओ

ॐ घेराओ घेराओ घेराओ घेराओ

ॐ निभ‌ाओ निभ‌ाओ निभ‌ाओ निभ‌ाओ

ॐ द‌लों में एक द‌ल अप‌न‌ा द‌ल, ॐ

ॐ अंगीक‌रण, शुद्धीक‌रण, राष्ट्रीक‌रण

ॐ मुष्टीक‌रण, तुष्टिक‌रण‌, पुष्टीक‌रण

ॐ ऎत‌राज़‌, आक्षेप, अनुश‌ास‌न

ॐ ग‌द्दी प‌र आज‌न्म व‌ज्रास‌न

ॐ ट्रिब्यून‌ल‌, ॐ आश्व‌ास‌न

ॐ गुट‌निरपेक्ष, स‌त्त‌ास‌ापेक्ष जोड़‌-तोड़‌

ॐ छ‌ल‌-छ‌ंद‌, ॐ मिथ्य‌ा, ॐ होड़‌म‌होड़

ॐ ब‌क‌व‌ास‌, ॐ उद‌घ‌ाट‌न‌

ॐ म‌ारण मोह‌न उच्च‌ाट‌न‌

ॐ क‌ाली क‌ाली क‌ाली म‌ह‌ाक‌ाली म‌ह‌ाक‌ाली

ॐ म‌ार म‌ार म‌ार व‌ार न ज‌ाय ख‌ाली

ॐ अप‌नी खुश‌ह‌ाली

ॐ दुश्म‌नों की प‌ाम‌ाली

ॐ म‌ार, म‌ार, म‌ार, म‌ार, म‌ार, म‌ार, म‌ार

ॐ अपोजीश‌न के मुंड ब‌ने तेरे ग‌ले क‌ा ह‌ार

ॐ ऎं ह्रीं क्लीं हूं आङ

ॐ ह‌म च‌ब‌ायेंगे तिल‌क और ग‌ाँधी की ट‌ाँग

ॐ बूढे़ की आँख, छोक‌री क‌ा क‌ाज‌ल

ॐ तुल‌सीद‌ल, बिल्व‌प‌त्र, च‌न्द‌न, रोली, अक्ष‌त, ग‌ंग‌ाज‌ल

ॐ शेर के द‌ाँत, भ‌ालू के न‌ाखून‌, म‌र्क‌ट क‌ा फोत‌ा

ॐ ह‌मेश‌ा ह‌मेश‌ा राज क‌रेग‌ा मेरा पोत‌ा

ॐ छूः छूः फूः फूः फ‌ट फिट फुट

ॐ श‌त्रुओं की छ‌ाती अर लोह‌ा कुट

ॐ भैरों, भैरों, भैरों, ॐ ब‌ज‌रंग‌ब‌ली

ॐ ब‌ंदूक क‌ा टोट‌ा, पिस्तौल की न‌ली

ॐ डॉल‌र, ॐ रूब‌ल, ॐ प‌ाउंड

ॐ स‌ाउंड, ॐ स‌ाउंड, ॐ स‌ाउंड

ॐ ॐ ॐ

ॐ ध‌रती, ध‌रती, ध‌रती, व्योम‌, व्योम‌, व्योम‌, व्योम‌

ॐ अष्ट‌ध‌ातुओं के ईंटो के भ‌ट्टे

ॐ म‌ह‌ाम‌हिम, म‌हम‌हो उल्लू के प‌ट्ठे

ॐ दुर्ग‌ा, दुर्ग‌ा, दुर्ग‌ा, त‌ारा, त‌ारा, त‌ारा

ॐ इसी पेट के अन्द‌र स‌म‌ा ज‌ाय स‌र्व‌ह‌ारा

ह‌रिः ॐ त‌त्स‌त, ह‌रिः ॐ त‌त्स‌त‌

[रचनाकार:नागार्जुन - 1969]

 

मंत्र कविता / नागार्जुन

ॐ श‌ब्द ही ब्रह्म है..

ॐ श‌ब्द्, और श‌ब्द, और श‌ब्द, और श‌ब्द

ॐ प्रण‌व‌, ॐ न‌ाद, ॐ मुद्रायें

ॐ व‌क्तव्य‌, ॐ उद‌ग‌ार्, ॐ घोष‌णाएं

ॐ भ‌ाष‌ण‌...

ॐ प्रव‌च‌न‌...

ॐ हुंक‌ार, ॐ फ‌टक‌ार्, ॐ शीत्क‌ार

ॐ फुस‌फुस‌, ॐ फुत्क‌ार, ॐ चीत्क‌ार

ॐ आस्फ‌ाल‌न‌, ॐ इंगित, ॐ इश‌ारे

ॐ न‌ारे, और न‌ारे, और न‌ारे, और न‌ारे

ॐ स‌ब कुछ, स‌ब कुछ, स‌ब कुछ

ॐ कुछ न‌हीं, कुछ न‌हीं, कुछ न‌हीं

ॐ प‌त्थ‌र प‌र की दूब, ख‌रगोश के सींग

ॐ न‌म‌क-तेल-ह‌ल्दी-जीरा-हींग

ॐ मूस की लेड़ी, क‌नेर के प‌ात

ॐ ड‌ाय‌न की चीख‌, औघ‌ड़ की अट‌प‌ट ब‌ात

ॐ कोय‌ल‌ा-इस्प‌ात-पेट्रोल‌

ॐ ह‌मी ह‌म ठोस‌, ब‌ाकी स‌ब फूटे ढोल‌

ॐ इद‌म‌ान्नं, इम‌ा आपः इद‌म‌ज्य‌ं, इद‌ं ह‌विः

ॐ य‌ज‌म‌ान‌, ॐ पुरोहित, ॐ राज‌ा, ॐ क‌विः

ॐ क्रांतिः क्रांतिः स‌र्व‌ग्व‌ं क्रांतिः

ॐ श‌ांतिः श‌ांतिः श‌ांतिः स‌र्व‌ग्व‌ं श‌ांतिः

ॐ भ्रांतिः भ्रांतिः भ्रांतिः स‌र्व‌ग्व‌ं भ्रांतिः

ॐ ब‌च‌ाओ ब‌च‌ाओ ब‌च‌ाओ ब‌च‌ाओ

ॐ ह‌ट‌ाओ ह‌ट‌ाओ ह‌ट‌ाओ ह‌ट‌ाओ

ॐ घेराओ घेराओ घेराओ घेराओ

ॐ निभ‌ाओ निभ‌ाओ निभ‌ाओ निभ‌ाओ

ॐ द‌लों में एक द‌ल अप‌न‌ा द‌ल, ॐ

ॐ अंगीक‌रण, शुद्धीक‌रण, राष्ट्रीक‌रण

ॐ मुष्टीक‌रण, तुष्टिक‌रण‌, पुष्टीक‌रण

ॐ ऎत‌राज़‌, आक्षेप, अनुश‌ास‌न

ॐ ग‌द्दी प‌र आज‌न्म व‌ज्रास‌न

ॐ ट्रिब्यून‌ल‌, ॐ आश्व‌ास‌न

ॐ गुट‌निरपेक्ष, स‌त्त‌ास‌ापेक्ष जोड़‌-तोड़‌

ॐ छ‌ल‌-छ‌ंद‌, ॐ मिथ्य‌ा, ॐ होड़‌म‌होड़

ॐ ब‌क‌व‌ास‌, ॐ उद‌घ‌ाट‌न‌

ॐ म‌ारण मोह‌न उच्च‌ाट‌न‌

ॐ क‌ाली क‌ाली क‌ाली म‌ह‌ाक‌ाली म‌ह‌ाक‌ाली

ॐ म‌ार म‌ार म‌ार व‌ार न ज‌ाय ख‌ाली

ॐ अप‌नी खुश‌ह‌ाली

ॐ दुश्म‌नों की प‌ाम‌ाली

ॐ म‌ार, म‌ार, म‌ार, म‌ार, म‌ार, म‌ार, म‌ार

ॐ अपोजीश‌न के मुंड ब‌ने तेरे ग‌ले क‌ा ह‌ार

ॐ ऎं ह्रीं क्लीं हूं आङ

ॐ ह‌म च‌ब‌ायेंगे तिल‌क और ग‌ाँधी की ट‌ाँग

ॐ बूढे़ की आँख, छोक‌री क‌ा क‌ाज‌ल

ॐ तुल‌सीद‌ल, बिल्व‌प‌त्र, च‌न्द‌न, रोली, अक्ष‌त, ग‌ंग‌ाज‌ल

ॐ शेर के द‌ाँत, भ‌ालू के न‌ाखून‌, म‌र्क‌ट क‌ा फोत‌ा

ॐ ह‌मेश‌ा ह‌मेश‌ा राज क‌रेग‌ा मेरा पोत‌ा

ॐ छूः छूः फूः फूः फ‌ट फिट फुट

ॐ श‌त्रुओं की छ‌ाती अर लोह‌ा कुट

ॐ भैरों, भैरों, भैरों, ॐ ब‌ज‌रंग‌ब‌ली

ॐ ब‌ंदूक क‌ा टोट‌ा, पिस्तौल की न‌ली

ॐ डॉल‌र, ॐ रूब‌ल, ॐ प‌ाउंड

ॐ स‌ाउंड, ॐ स‌ाउंड, ॐ स‌ाउंड

ॐ ॐ ॐ

ॐ ध‌रती, ध‌रती, ध‌रती, व्योम‌, व्योम‌, व्योम‌, व्योम‌

ॐ अष्ट‌ध‌ातुओं के ईंटो के भ‌ट्टे

ॐ म‌ह‌ाम‌हिम, म‌हम‌हो उल्लू के प‌ट्ठे

ॐ दुर्ग‌ा, दुर्ग‌ा, दुर्ग‌ा, त‌ारा, त‌ारा, त‌ारा

ॐ इसी पेट के अन्द‌र स‌म‌ा ज‌ाय स‌र्व‌ह‌ारा

ह‌रिः ॐ त‌त्स‌त, ह‌रिः ॐ त‌त्स‌त‌

[रचनाकार:नागार्जुन - 1969]

 

 

संजयझा के ब्‍लॉग से साभार

10 comments:

maithily said...

जुबीन ने इसमें संगीत भी दिया है. बाबा के मुरीद संजय झा में ने ये फिल्म बाबा को ही समर्पित की है. इस गीत को बड़े पर्दे पर देखना एक न भूलने वाला अनुभव है.
आपने इसे सुनने का अवसर दिया, धन्यवाद

masijeevi said...

शुकिया मैथिलीजी,
ये अजब बिडंबना है कि खुद ज़ुबीन को भी काफी कुछ सहना पड़ रहा है, हिंदी फिल्‍मों के लिए काम करने के कारण- वे अरसे से असम में हिंदी विरोधियों की हिट लिस्‍ट में हैं।

काकेश said...

बहुत खूब.बाबा की इस अद्भुत कविता को इतने अच्छे संगीत के साथ सुनना दिव्य अनुभव है.मैथिली जी बड़े पर्दे पर भी देखते हैं.

हम तो सोचे पॉडकास्ट है तो आपकी आवाज में ही होगी:-)

Sanjeet Tripathi said...

जबरदस्त!!

शुक्रिया!!

हरिराम said...

देव-मूर्तियों के लिए अष्टधातुओं में कौन-कौन-सी धातु कितने परिमाण/प्रतिशत में मिलाई जानी चाहिए? किसी शास्त्र-पुराण में इसका उल्लेख हो तो उद्धृत करें।

अजय यादव said...

शुक्रिया मसिजीवी जी! इस खूबसूरत रचना को सुनवाने और पढ़वाने के लिये!

-अजय यादव
http://ajayyadavace.blogspot.com/
http://merekavimitra.blogspot.com/

राजीव said...

पहले पॉडकास्ट की बधाई। बहुत खूब कविता से पॉड्कस्ट आरंभ किया है।

कमाल है बाबा नागार्जुन का, सन 70 के लगभग लिखी कविता में किये गये संकेत आज भी कितने प्रासंगिक और सत्य सिद्ध हो रहे हैं।

Udan Tashtari said...

बेहतरीन!

शायद आप न सुनवाते तो हमें कभी मालूम भी न चलता, बहुत आभार.

प्रथम सफल पॉडकास्टिंग की बहुत बधाई.

अब जारी हो जायें लगातार-नये नये आईटम सुनवाने के लिये. :)

Pratyaksha said...

बढ़िया ।

इष्ट देव सांकृत्यायन said...

अद्भुत !!!