मुशर्रफ के खिलाफ प्रतिरोध के मौलिक स्वर: लै के पेंशन जाऊंदा क्यूँ नईं - वीडियो में
यू ट्यूब पाकिस्तान में (या विदेश में बसे पाकिस्तानियों का) प्रतिरोध व्यक्त करने का नायाब जरिया बनकर उभरा है। उदाहरण के लिए मुझे शिवम के ब्लॉग पर पंजाबी कविता का यह मजेदार वीडियो देखने का मिला। आप भी देखें मजे लें (कश्मीर वगैरह पर एकाध लाईन से कुछ गुस्सा आए तो बेचारे पड़ोसी देश पर तरस खाते हुए नजरअंदाज कर दें :))





4 टिप्पणियॉं:
कहीं-कहीं पुनरुत्थानवादी प्रतीत होते हुए भी यह पंजाबी गीत 'लै के पिंशन जांदा क्यों नईं', पाकिस्तान की जनता में गहरे पैठ गए मुशर्रफ़-विरोधी और अमेरिकाविरोधी सेंटीमेंट की सहज अभिव्यक्ति है .
मजेदार है गीत!
देख लिया जी. मजा आया.
खास पंजाबी शेली का यह गीत पाकिस्तान वासियों की मानसिक दशा दर्शाता है और ऐसे में भी उनकी मस्त प्रवृत्ति दर्शाता है ।
घुघूती बासूती
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