Tuesday, September 11, 2007

इस नए संस्‍करण में खेल कहॉं है

शास्‍त्रीजी द्वारा प्रस्‍तुत दीपक के लेख में आज कहा ही था कि क्रिकेट में से खेल अब लुप्‍त होता जा रहा है। आज ही T-20 का विश्‍वकप शुरू हुआ है और क्‍या कार्यक्रम है हुजूर- हमें क्रिकेट तो नहीं लगा एक मनोरंजन का वैराइटी प्रोग्राम भर लगा। अपने टीवी से कुछ तस्‍वीरें कैप्‍चर की हैं देखें- भला जेन्‍टलमैनों के 'खेल' ऐसे होते हैं क्‍या -





वैसे कुछ क्रिकेटीय क्षण भी थे। जैसे गेल का शतक-



कुल मिलाकर हमें तो लगता है कि मीडिया के लिए मनोरंजन का तमाशा तैयार करने के लिए खेल हो रहा था। पता नहीं अब प्रभाष जोशी क्‍या लिखेंगे ?

3 comments:

vimal verma said...

आपकी बात से मै भी इत्तेफ़ाक रखता हूं..अब तो कम से कम शास्त्रीय क्रिकेट तो बहुत दूर की कौड़ी होती जा रही है..

Udan Tashtari said...

शास्त्रीय क्रिकेट?? :)

-मगर आने वाला समय इसी २०/२० का है. किसके पास समय हैं पाँच दिन बैठकर अपनी हार देखने का.

Shastri JC Philip said...

प्रिय मसिजीवी,

मेरे हिसाब से तो क्रिकेट को अब हिन्दुस्तान से देशनिकाला दे देना चाहिये -- शास्त्री जे सी फिलिप



आज का विचार: चाहे अंग्रेजी की पुस्तकें माँगकर या किसी पुस्तकालय से लो , किन्तु यथासंभव हिन्दी की पुस्तकें खरीद कर पढ़ो । यह बात उन लोगों पर विशेष रूप से लागू होनी चाहिये जो कमाते हैं व विद्यार्थी नहीं हैं । क्योंकि लेखक लेखन तभी करेगा जब उसकी पुस्तकें बिकेंगी । और जो भी पुस्तक विक्रेता हिन्दी पुस्तकें नहीं रखते उनसे भी पूछो कि हिन्दी की पुस्तकें हैं क्या । यह नुस्खा मैंने बहुत कारगार होते देखा है । अपने छोटे से कस्बे में जब हम बार बार एक ही चीज की माँग करते रहते हैं तो वह थक हारकर वह चीज रखने लगता है । (घुघूती बासूती)