ये दिल्ली वाली मीट की बात..... पहरुए सावधान रहना।
दिल्ली की आगामी ब्लॉगर मीट को बड़ी वाली मीट, अंतर्राष्ट्रीय हिदी चिट्ठाकार सम्मेलन आदि कहा जा सकता है और कहा जा रहा है। इसे जब अनूपजी ने ‘महा पंचायत’ करार दिया तो संजयजी ने झट सलाह दी कि भई ऐसा न कहें- मिल बैठने के लिए जा रहे हैं कोई पंचैटी नहीं हो रही है- जो भी हो सिर्फ संज्ञा का मामला है वरना है तो ये अलग किस्म की भेंट। इधर उधर छाना, लगा कि भई इस भेंटने में कई मजेदार अंडर करेंट भी बह रही हैं इसलिए हम फिलहाल ऐतिहासिक भर कहे देते हैं पहले से ही। किसी ब्लॉगर मीट का कोई ऐजेंडा नहीं हो सकता – न तो व्यक्त न हिडन। पर फिर भी हम वाकई कल्पना करने से अपने को रोक नहीं पा रहे हैं कि जब अविनाश संजयजी से मिलेंगे और गर्मजोशी से हाथ मिलाने की फोटोऑप औपचारिकता पूरी करेंगे तब उनके मन में क्या चल रहा होगा- उससे भी ज्यादा मजेदार यह कि जब जीतू भाई इस मीट में होगे तो गैर-नारदीय चिट्ठाकारों से कहने के लिए उनके पास क्या होगा...सच बहुत मजा आने वाला है और सरवणा भवन के लजीज व्यंजनों के बीच ही कुछ ऐतिहासिक क्षण भी परोसे जाने वाले हैं इस 'मीट' में – ये मीट की बात पहरुए सावधान रहना। (सरवणा भवन शुद्ध शाकाहारी व्यंजन परोसता है)
ये क्यों एक खास मीट है-
पहला कारण तो है नंबर- शीयर नंबर। जितने चिट्ठाकारों के इस मीट में शामिल होने की संभावना है उसके आधे भी हिंदी की किसी चिट्ठाकार मीट में अब तक शामिल नहीं हुए हैं। दुबई से जीतू आ रहे हैं, अमदाबाद से संजय तो यमुनानगर से श्रीश। कलकत्ता से प्रियंकरजी के आने की भी संभावना जताई जा रही है। दिल्ली तो खैर राजधानी ठहरी इसलिए सर्वश्री अविनाश, सृजन, रवीश, प्रत्यक्षा, अरुण, अमित, सुजाता, जगदीश, आलोक, मैथिली, भूपेन, काकेश, इष्टदेव आदि के भी शामिल होने में ज्यादा संदेह नहीं होना चाहिए- सब मिलाकर एक बड़ी संख्या बनती है। गैर नारदीय चिट्ठाकार यशवंत, सचिन आदि भी रहेंगे शायद खुद राहुल भी हों। तो भई गनीमत है कि रामलीला मैदान बुक नहीं करना पड़ा वरना आसार वैसे ही थे। हमें अब भी शक है कि 7 फीट की मेजेनिन छत वाले कॉफी डे में इतने चिट्ठाकार समाएंगे कैसे- अब जो कन्फर्म नहीं कर रहें हैं उन्हें वापस तो लौटा तो देंगे नहीं- ये कोई नारद तो है नहीं कि रजिस्ट्रेशन क्यों नहीं कराया- ये तो दिल्ली की मीट है और दिल्ली का दिल बड़ा है इसलिए बुला बुला कर लोग लाए जाएंगे। खैर डीटीसी में यात्रा करते करते जरा खिसकना यार की आदत है इसलिए ‘दिल में जगह होनी चाहिए’ जुमले के सहारे काम चल जाएगा।
बड़ी संख्या से ही जुड़ा मामला जो बेहद रोचक है वो यह है कि लफड़ों वाले बहुत से लोग शामिल होंगे- अविनाश तो खैर हैं ही (वैसे उनका कन्फर्मेशन भी दिखा नहीं , पर रहेंगे ही – रहना पड़ेगा) सो अविनाश-संजय मामला होगा। यदि भड़ासी होंगे तो ये देखना रह जाएगा कि भाषा पर होने वाली बात कहॉं तक जाएगी।भड़ासी मित्रों के आने की संभावना का पता चलते ही संजयजी ने प्रसन्न होकर पूछा 'उनके इरादे क्या हैं' :)। एक और बात इस मीट में अमित, जीतू जैसे कुछ विजार्ड्स को छोड़ दें तो भाषा वाले लोग ज्यादा रहेंगे यानि गीक नहीं- इंसान। तो बातों की दिशा -भाषा, शैली, समाज पर ही रहेगी। शायद टेंपलेट वगैरह पर भी हो चर्चा। पर ज्यादातर तो हमारी समझ में आ सकने वाले स्टफ पर ही होगी।
उसके बाद आएंगी इस मीट की रपटें- अगर 15 रपट आएंगी तो भई क्या लिखेंगे लोग। एक भला तो खैर यह होगा कि हर प्रतिभागी को 15 लिंक सीधे मिल जाएंगे और ये बड़ी बात है। खासकर नए चिट्ठेकार एक साथ इतने लिंक पाकर रैंक में कई पायदान ऊपर पहुँचेंगे जो हिंदी की चिट्ठाकारी के लिए अच्छा है। इसलिए जो लोग असमंजस में हैं कि आएं कि नहीं वे और न सही इस मुद्रा के लिए ही आने का मन बना लें कि टेक्नाराटी मैया (और अब चिट्ठाजगत.इन) के दरबार में आपकी पूछ बहुत बढ़ जाएगी। खैर तो रपट जो आएंगी और फिर उन पर प्रति-रपटें उनकी भी हमें खूब प्रतीक्षा है।
इसलिए सिर्फ दिल्ली के ही नहीं आगरा (क्या प्रतीक दो सो किमी टिकट 70 रूपए, आ जाओ यार), कानपुर और यहॉं वहॉं के सभी हिंदी चिट्ठाकार चले आएं हम प्रतीक्षा में हैं। अपना कन्फर्मेशन तुरंत भेजें। और हॉं पिछली बार की तरह अपने खाने का बिल किसी एक के मथ्थे मत मढ़ देना- अपना अपना खर्चा खुद उठाना।










