Tuesday, July 10, 2007

गूगलित अहम......कौन आमिर खान...क्‍या नामवर सिंह

मैं कौन हूँ ? मैं क्‍या चीज हूँ ? क्‍या बिसात है अपनी ? हमारे चवन्निया अहम के लिए कभी कभी ये सवाल अहम हो जाते हैं। अमरीका ने जब गूगलिंग करना शुरू ही किया था तो लोगों का अहम इस बात से खूब फूलता-पिचकता था कि इंटरनेट उनकी शख्सियत को कोई अहमियत देता है कि नहीं। दूसरो को जानने का भी ये एक लोकप्रिय तरीका हुआ। पहले से अनजान लोगों से डेट करने से पहले युवा अपने साथी के विषय में जानने के लिए गूगलिंग करने लगे।
हिंदी में गूगल ही एक नई परिघटना है इसलिए जाहिर है गूगलिंग से दूसरे के बारे में जानने का चलन कम है। पर अगर ये कुछ लोगों के लिए कारगर है तो जाहिर है ये हम ही हैं- हिंदी के ब्‍लॉगर- यानि हिंदी हाईपर टेक्‍स्‍ट सृजन में सबसे आगे। तो इंटरनेट पर आपकी व्‍याप्ति कितनी है इसका उत्‍तर अगर आपको .02 सेकंड में पता चले कि लगभग 22500 बेवपेजों में आपका उल्‍लेख है तो जाहिर है कि आपका सीना गर्व से चौड़ा हो सकता है कि चलो हम कहीं तो बहुत लोकप्रिय हैं। खैर ये हमने अपने विषय में नहीं कहा था- ये हैं अपने सुपर स्‍टार सकुलजी देखें- .02 सेकंड में 22500





कुछ अन्‍य हस्तियॉं जिनका अहम की मिजाजपुरसी गूगल खोज से हम कर रहे हैं- वे हैं जीतू भाई, .09 सेकेंड में 9980




रवि रतलामीजी, .10 सेकेंड में 11500


समीर भाई .17 सेकेंड में 28500



और हमारे प्रिय चिट्ठाकार सुनील दीपक। .09 सेकेंड में 16100




आप भी अपने अहम को सहला सकते हैं, आसान है- गूगल पर जाएं अपना नाम खिड़की में लिखें और अपनी अंतर्जाल व्‍याप्ति की रपट देखें , एक सेकेंड से भी कम में। हमने भी देखी है अपनी, पर बताएंगे नहीं- इतनी इंप्रेसिव नहीं है। कैसे होगी- समीर बहुत हो सकते हैं, जिंतेंद्र, सुनील भी पर मसिजीवी तो ऐसा नाम है कि अब तक तो कोई हुआ नहीं..इसलिए दोहराव नहीं। पर फिर भी साहब हम बता दें कि हमारी व्‍याप्ति नामवर सिंह और आमिर खान से ज्‍यादा है। क्‍या...आप इन लोगों को नहीं जानते...ओह लो देखें।






अब तो शर्म कर आमिर खान को रविजी की बात मानकर अपना ब्‍लॉग बना ही लेना चाहिए।

8 comments:

maithily said...

अरे रहने दीजिये इन बालीबुडिओं को किसी तो क्षेत्र में अपने पीछे

जगदीश भाटिया said...

बहुत पहले हमने भी इस पर लिखा था यहां देखिये
http://aaina2.wordpress.com/2007/02/04/bloggers/

अरुण said...

अरे.... मसीजीवी जी डर गये लगता है.जरा पंगेबाज लिख कर तो देखते .सबसे पहले आते है.गूगल भी डरता है ध्यान रखियेगा...

ravish said...

क्या बात है सर। अब ध्यानार्थ की जगह गूगलार्थ लिखा जाएगा। गूगल में डूबकी लगा कर नाम जल ले आते हैं।

Udan Tashtari said...

धन्य हो गये, अब तो गुगल को रोज अगरबत्ती लगाया करेंगे.

Shrish said...

वैसे जी हमारा नाम भी काफी यूनीक है पर फिर भी बोलने-बताने लायक संख्या आ ही जाती है। :)

दिल को खुश रखने का...

अनूप शुक्ला said...

हां हम देख रहे हैं। खुश भी गये। :)

Raviratlami said...

मैं भी खुश हो गया - आमिर से आगे जो हूँ गूगलिंग में.

परंतु अग्रेज़ी में हिसाब बहुतेई उल्टा पड़ेगा :)